मूल अधिकार: न्यायालयों की न्यायिक-पुनर्विलोकन की शक्ति और उसका अपवर्जन || Power of Judicial Review and Exclusion of Courts

मूल अधिकार: न्यायालयों की न्यायिक-पुनर्विलोकन की शक्ति     वस्तुतः  अनुच्छेद 13 न्यायालयों को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है। संविधान ने इस शक्ति को भारत के उच्चतम न्यायालय को प्रदान किया है। उच्चतम न्यायालय किसी भी विधि को जो मूल अधिकारों से असंगत है, अवैध घोषित कर सकता है। न्यायिक पुनर्विलोकन का अर्थ एवं आधार  प्रोफेसर कारविन के अनुसार, न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति न्यायालयों की वह...

मूल अधिकार: राज्य के विरुद्ध संरक्षण || Fundamental Rights: Protection against the state

मूल अधिकार: राज्य के विरुद्ध संरक्षण मूल अधिकार राज्य के विरुद्ध संरक्षण हैं-   मूल अधिकारों का जन्म जनता और राज्य शक्ति के बीच संघर्ष का परिणाम है। व्यक्ति अपने अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा राज्य शक्ति के विरुद्ध ही आवश्यक समझता है।  राज्य शक्ति के समक्ष वह कमजोर होता है। भारतीय संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकार राज्य शक्ति के विरुद्ध गारंटी किए गए हैं ना कि सामान्य व्यक्तियों के अवैध कृतियों के विरुद्ध। व्यक्तियों...

मूल-अधिकारों का निलंबन || Suspension of the Fundamental Rights

मूल-अधिकारों का निलंबन जैसा कि विदित है, मूल-अधिकार अत्यंतिक अधिकार नहीं है। इन अधिकारों के प्रयोग पर युक्तियुक्त निर्बंधन लगाए जा सकते हैं। संविधान में उन परिस्थितियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है जब राज्य को यह अधिकार होगा कि लोक-साधारण के हित में नागरिकों के मूल अधिकारों को निलंबित कर सके या उनके प्रयोग पर निर्बंधन लगा सके। निम्नलिखित अवस्थाओं में नागरिकों के मूल-अधिकारों को निर्बंधित अथवा निलंबित किया जा सकता है: 1- प्रतिरक्षा...

मूल अधिकारों की विस्तृत व्याख्या / निर्वचन | Detailed interpretation of Fundamental Rights

नवीन दृष्टिकोण मूल अधिकारों की विस्तृत व्याख्या / निर्वचन | Detailed interpretation of Fundamental Rights   संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार सुभिन्न और परस्पर अनन्य अधिकार नहीं है, जिनकी पृथक-पृथक अनुच्छेदों में गारंटी की गई है (गोपालन का मामला) । ये सभी संविधान की उद्देशिका में प्रयुक्त सुसम्बद्ध युक्ति सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक के भाग हैं। उनको पृथक-पृथक नहीं देखा जा सकता है। ये सब अधिकार जो मनुष्य...

भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार | मूल अधिकारों की उत्पत्ति एवं विकास

मूल अधिकार मूल अधिकारों की उत्पत्ति एवं  विकास   भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता जनता के मूल अधिकारों की घोषणा है। संविधान के भाग 3 में इन अधिकारों का  विशद रूप से उल्लेख किया गया है। भारतीय संविधान में जितने विस्तृत और व्यापक रूप से इन अधिकारों का उल्लेख किया गया है, उतना संसार के किसी भी लिखित संघीय संविधान में नहीं किया गया है। भारतीय संविधान में मूल अधिकारों से संबंधित उपबंधों  का समावेश आधुनिक प्रजातांत्रिक...

नागरिकता | Citizenship

नागरिकता के सांविधानिक उपबंध  नागरिकता अनुच्छेद 5 - 11 ...

संघ और इसका राज्य क्षेत्र | अनुच्छेद 1 से 4

संघ और इसका राज्य क्षेत्र  अनुच्छेद 1 से 4 ...